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Thursday, August 27, 2015
गांव का दलीप राणा कैसे बन गया WWE का स्टार 'द ग्रेट खली'
लंबाई 7 फिट एक इंच, वजन 157 किग्रा और इकलौता भारतीय वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियन। इतना काफी होगा दलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली को परिभाषित करने के लिए। वे दुनिया के तमाम दिग्गज पहलवानों को वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) की रिंग में धूल चटाने वाले भारत के सबसे शक्तिशाली पहलवान हैं। दलीप सिंह राणा (द ग्रेट खली) का जन्म 27 अगस्त, 1972 को हिमाचल प्रदेश के धिराना गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम ज्वाला और मां का नाम टंडी देवी है। प्रोफेशनल रेसलिंग से संन्यास लेने के बाद अब खली पत्नी हरमिंदर कौर के साथ इंडिया में खूबसूरत जिंदगी जी रहे हैं। इस मौके पर dainikbhaskar.com आपको खली की निजी जिंदगी के बारे में कुछ रोचक बातें बताने जा रहा है।
रोड परियोजना' के लिए तोड़ते थे पत्थर
आज खली भले ही इंटरनेशनल WWE स्टार हैं, लेकिन वे कभी 'रोड परियोजना' के लिए पत्थर तोड़ने का काम करते थे। खली के गांव धिराना की औरतें उनसे भारी भरकम काम करवाती थीं। जैसे- जानवरों को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह रखना, सामान उठवाना। इसी दौरान खली पर पुलिस ऑफिसर एमएस भुल्लर की निगाह पड़ी। उनकी सहायता से खली पंजाब पुलिस में एएसआई पद पर शामिल हुए।
अमित स्वामी का बड़ा योगदान, येट्स ने दी थी WWE में आने की सलाह
खली के लिए उनके दोस्त अमित स्वामी काफी लकी हैं। खली अपने दोस्त अमित स्वामी के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पसंदीदा पहलवान डोरियन येट्स से मिलने गए। येट्स खली का डीलडौल देखकर बेहद प्रभावित हुए और उन्हें रेसलिंग में किस्मत आजमाने का सुझाव दिया। येट्स का यही सुझाव खली को जापान ले गया। इसके बाद खली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अमेरिका जाकर 'डब्ल्यूडब्ल्यूई' में अपना अलग मुकाम बनाया।
खली के लिए उनके दोस्त अमित स्वामी काफी लकी हैं। खली अपने दोस्त अमित स्वामी के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पसंदीदा पहलवान डोरियन येट्स से मिलने गए। येट्स खली का डीलडौल देखकर बेहद प्रभावित हुए और उन्हें रेसलिंग में किस्मत आजमाने का सुझाव दिया। येट्स का यही सुझाव खली को जापान ले गया। इसके बाद खली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अमेरिका जाकर 'डब्ल्यूडब्ल्यूई' में अपना अलग मुकाम बनाया।
किसी ने कहा जायंट सिंह तो किसी ने भीम
खली दुनियाभर में मशहूर डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर 'हल्क होगन', जॉन सीना, 'द रॉक' सहित कई रेसलर्स के साथ काम कर चुके हैं। 'डब्ल्यूडब्ल्यूई' को राणा का नया नाम ढूढ़ने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। किसी ने उन्हें 'जायंट सिंह' कहा तो किसी ने उन्हें 'भीम' नाम से संबोधित किया।
खली दुनियाभर में मशहूर डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर 'हल्क होगन', जॉन सीना, 'द रॉक' सहित कई रेसलर्स के साथ काम कर चुके हैं। 'डब्ल्यूडब्ल्यूई' को राणा का नया नाम ढूढ़ने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। किसी ने उन्हें 'जायंट सिंह' कहा तो किसी ने उन्हें 'भीम' नाम से संबोधित किया।
इसलिए राणा बन गया खली
सात फीट एक इंच लंबे भीमकाय शरीर वाले खली मां काली के बड़े भक्त हैं। कुछ लोगों ने तो उन्हें 'भगवान शिव' नाम रखने की सलाह दी, लेकिन इस नाम को भी ख़ारिज कर दिया गया, क्योंकि इससे भारत में रहने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी। फिर उन्होंने 'मां काली' का नाम सुझाया और उनकी विनाशकारी शक्तियों के बारे में बताया। मां काली के नाम पर ही उन्हें फैन्स खली कहने लगे।
सात फीट एक इंच लंबे भीमकाय शरीर वाले खली मां काली के बड़े भक्त हैं। कुछ लोगों ने तो उन्हें 'भगवान शिव' नाम रखने की सलाह दी, लेकिन इस नाम को भी ख़ारिज कर दिया गया, क्योंकि इससे भारत में रहने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी। फिर उन्होंने 'मां काली' का नाम सुझाया और उनकी विनाशकारी शक्तियों के बारे में बताया। मां काली के नाम पर ही उन्हें फैन्स खली कहने लगे।
Wednesday, August 26, 2015
'शोले' के रहीम चाचा की अंतिम यात्रा में पहुंची थीं प्रियंका, दिखे थे कई सेलेब्स
1975 की सुपरहिट फिल्म 'शोले' के रहीम चाचा यानी एक्टर ए. के. हंगल 26 अगस्त 2012 को दुनिया को अलविदा कह गए थे। जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो शशि कपूर, प्रियंका चोपड़ा, दीया मिर्जा, अर्जुन रामपाल, अवतार गिल, डैनी डेन्जोंगपा, रंजीत, रजा मुराद और इला अरुण जैसी कई बॉलीवुड हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं। हालांकि, इस दौरान फिल्म 'शोले' में उनके साथ काम कर चुके कलाकार अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी नजर नहीं आए थे। बता दें कि ए. के. हंगल को बॉलीवुड अभिनेता ही नहीं, बल्कि फ्रीडम फाइटर के रूप में भी जाना जाता था। 1929 से 1947 तक उन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
2006 में बॉलीवुड में सराहनीय योगदान के लिए पद्मभूषण से सम्मानित हुए हंगल साहब के पास आखिरी वक्त में इतना पैसा भी नहीं था कि वे अपना इलाज करा सकते। इस दौरान जया बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और सलमान खान जैसे कई स्टार्स उनकी मदद के लिए आगे आए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने उनके इलाज के लिए 50 हजार रुपए दिए थे, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। 26 अगस्त 2012 को हंगल साहब का निधन हो गया था। मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया था, जिसमें बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुई थीं।
'शोले' के अलावा कुछ चुनिंदा फिल्में, जिनमें ए. के. हंगल ने किया था काम :
शागिर्द (1967), बावर्ची (1972), अभिमान (1973), नमक हराम (1973), आपकी कसम (1974), दीवार (1975), चितचोर (1976), ईमान धरम (1977), बेशरम (1978), खानदान (1979), जुदाई (1980), नरम गरम (1981), शौक़ीन (1982), अवतार (1983), शराबी (1984), मेरी जंग (1985), डकैत (1987), खून भरी मांग (1988), फरिश्ते (1991), खलनायक (1993), दिलवाले (1994), शरारत (2002) और पहेली (2005)
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