Wednesday, August 12, 2015

पैसों की कमी से सुंदर पिचाई और अंजलि नहीं कर पाते थे बात, फिर भी जवां रहा प्यार

2004 से लेकर अब तक 2015 यानी पूरे 11 साल में गूगल के साधारण कार्यकर्ता से CEO तक का सफर सुंदर पिचाई के लिए आसान नहीं था, इन 11 सालों में उन्होंने  ना सिर्फ कंपनी का विश्वास जीता है बल्कि गूगल की कई सर्विसेज को एक नए आयाम पर पहुंचाया है. कल हमने आपको बताया कि कैसे गूगल के सभी फ्रंट प्रोडक्ट के इंचार्ज से पिचाई को सोमवार एक इवेंट के दौरान बतौर गूगल CEO इंट्रोड्यूस किया. वहीं गूगल ने अपनी नई Mother कंपनी अल्फाबेट.इंक का भी ऐलान किया जिसमें गूगल बतौर सहायक कंपनी काम करेगा.
पिचाई एक टेक लीडर हैं, गूगल में उनके हुनर और उनकी योग्यता से तो आप सभी वाकिफ हैं पर अपने काम के लिए इतने फोकस्ड इंसान की लव लाइफ के बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे. आज हम आपको टेक दिग्गज सुंदर पिचाई की लव लाइफ के बारे में बताने जा रहे हैं. 42 साल के पिचाई ने अपनी लॉन्ग-टाइम गर्लफ्रेंड आंजलि से शादी रचाई है.
अंजलि राजस्थान की कोटा की रहने वाली हैं, दोनों की मुलाकात आईआईटी खड्गपुर में हुई थी कॉलेज के फाइनल ईयर में पिचाई ने अंजलि को प्रपोज किया इसके बाद दोनों के बीच नए रिश्ते की शुरुआत हुई.  आईआईटी के बाद सुंदर पिचाई आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए लेकिन अंजलि भारत में ही रहीं. पिचाई के पारिवारिक करीबी ने बताया जब पिचाई अमेरिका में थे तो पैसों की कमी के कारण दोनों कई-कई महीनों तक बात नहीं किया करते थे.  अपनी  पढ़ाई पुरी करते ही पिचाई ने  सेमीकंडक्टर फर्म ज्वॉइन की और  आंजलि के माता-पिता से इजाजत लेकर शादी कर ली   दोनों के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी हैं,

पिचाई ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके इस मुकाम तक पहुंचने में उनकी पत्नी अंजलि ने बड़ी भूमिका निभाई है. पिचाई अपने पूरे परिवार के साथ  कैलिफोर्निया में रहते हैं. सुंदर पिचाई ने अमेरिकी नागरिकता स्वीकार  कर ली है. 

'बैंगिस्तान' का बजा गया बैंड, 'दृश्यम' कमा रही सबसे ज्यादा


वैसे तो पिछले दिनों बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई के आंकड़े लगातार बरस रहे थे। मगर इससे परे एक बार फिर वहां पर सन्न्ाटा पसरा है। यह काम किया है हालिया रिलीज फिल्में 'बैंगिस्तान' और 'जांनिसार' ने।
रिलीज से पहले दोनों ही फिल्मों का कोई खास प्रमोशन नहीं किया गया था। 'बैंगिस्तान" तो भी खबरों में थी मगर 'जांनिसार' तो बिलकुल भी नहीं।
'बैंगिस्तान' के बारे में बात की जाए तो इसके प्रोमोज में ही ज्यादा बताया नहीं गया था। ऐसे में कोई इसमें इंट्रेस्ट लेता इसकी संभावना कम ही थी। पहले वीकेंड में जैसे-तैसे फिल्म ने 4 करोड़ का बिजनेस किया है।
रितेश देशमुख की पिछली 11 फिल्मों में से 8 फिल्में तो सफल रही हैं। इनमें से 'एक विलेन" और 'लाइ भारी' तो ब्लॉक बस्टर रही हैं। केवल 'हमशक्ल्स' ऐसी फिल्म थी जिससे निराशा हुई थी लेकिन यह फिल्म भी 65 करोड़ रुपए कमाने में कामयाब रही थी।
'जांनिसार' वीकेंड में 50 लाख रुपए का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। यदि फिल्म अगले सप्ताह नजर आती है तो आश्चर्य होगा। दूसरी तरफ अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम' इस वीकेंड पर 12 करोड़ का बिजनेस किया। अब तक फिल्म का कलेक्शन 60 करोड़ रुपए के आंकड़े पर पहुंच चुका है। बीते शुक्रवार से सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म 'दृश्यम' हो गई है। दूसरे नंबर पर 'बजरंगी भाईजान' कमा रही है और फिर है 'बाहूबली'।
ट्रेड जानकार अमोद मेहरा ने कहा 'बैंगिस्तान बड़ी फ्लॉप रही है। प्रोड्यूसर्स को भारी नुकसान होगा। 'जानिसार' पूरी तरह से धुल चुकी है। कुछ थिएटर से इसे हटा दिया गया है। अजय देवगन की 'दृश्यम' अभी भी बनी हुई है।'
उन्होंने बताया 'मलयालम फिल्म की रीमेक इस फिल्म को रिलीज हुए तीन हफ्ते हो चुके हैं। पिछले सात दिनों में फिल्म ने 28.09 करोड़ रुपए कमाए हैं। फिल्म का टोटल कलेक्शन 58.12 करोड़ रुपए का हो चुका है।'

बॉक्स ऑफिस
बैंगिस्तान - 3.77 करोड़ (ओपनिंग वीकेंड) 
दृश्यम - 28.09 करोड़ ( दूसरा सप्ताह , ओवरऑल 58.12 करोड़) 
बजरंगी भाईजान - 17.77 करोड़ ( चौथा सप्ताह, ओवरऑल 310 करोड़) 
बाहुबली - 4.49 करोड़ ( पांचवा सप्ताह, ओवरऑल 108 करोड़)

चीन में जन्मा दो मुंह वाला कोबरा, अपना ही सिर निगलने की करता है कोशिश


दुनियाभर में कई ऐसे अजीबोगरीब मामले सामने आते हैं, जो लोगों को हैरान करने वाले होते हैं। ऐसा ही एक मामला चीन के यूलिन सिटी के स्नेक फार्म में सामने आया है। दरअसल, इस फार्म में 10 दिन पहले एक दोमुंहे कोबरा का जन्म हुआ है। वह पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि, माना जाता है कि इस तरह के जीवों की उम्र काफी कम होती है, बावजूद इसके ये सांप जिंदा है।
बता दें कि चीन में जहरीले सांपों को पाला जाता है, इसके लिए कई जगहों पर लोगों ने फार्म भी बनाए हैं। इन सांपों की चमड़ी से बैग बनाए जाते हैं, साथ में इसके मीट को चीन में खूब पसंद किया जाता है। इसके अलावा मेडिसिन के लिए भी इन सांपों का उपयोग किया जाता है। यूलिन के रहने वाले स्नेक ब्रिडर मिस्टर हॉन्ग ने बताया कि उनके फार्म में 10 दिन पहले इस दोमुंहे सांप का जन्म हुआ था और वह लगातार बढ़ रहा है।
हॉन्ग के मुताबिक, शुरू में ये सांप कुछ भी नहीं खा रहा था, इस कारण से ऐसा लगा कि ये जिंदा नहीं बचेगा, लेकिन अब खाने लगा है। इसके दोनों मुंह दो अलग-अलग दिशाओं में हैं और एक दूसरे को निगलने की कोशिश करते हैं। मिस्टर हॉन्ग ने इस अनोखे सांप को नान्निंग जू को सौंप दिया है, ताकि बेहतर तरीके से इसकी देखभाल की जा सके।

आजादी के बाद इन पांच कामों से बदल गई भारत की तकदीर और सूरत


Tuesday, August 11, 2015

दुनिया के 7 महंगे मेटल, इस Metal के 1 ग्राम की कीमत है 393 लाख करोड़ रु.

 एंटीमैटर
सोने की कीमतें लगातार गिर रही हैं। दुनिया भर में सोने को निवेश और खरीदारी के लिए बेहतर माना जाता है। कीमती धातू होने के चलते इन दिनों सबसे अधिक डिमांड भी इसकी ही है। यही वजह है आम आदमी से लेकर देश की सरकारें तक सोना को ही रिजर्व के तौर पर रखती हैं। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी सोना दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में शामिल नहीं है। विश्व में कुछ ऐसी कमोडिटीज हैं, जो बहुत महंगी है। ऐसा ही एक मेटल है एंटीमैटर। एंटीमैटर के एक ग्राम की कीमत 6.25 लाख करोड़ डॉलर है, यानी 393.75 लाख करोड़ रुपए है। वहीं, सोने की 25200 रुपए प्रति दस ग्राम है।
क्या है ‘एंटीमैटर’
वैज्ञानिकों का कहना है कि एंटीमैटर दरअसल एक पदार्थ के ही समान है, लेकिन उसके एटम के भीतर की हर चीज उलटी है। एटम में सामान्य तौर पर पॉजिटिव चार्ज वाले न्यूक्लियस और नेगेटिव चार्ज वाले इलैक्ट्रोंस होते हैं, लेकिन एंटीमैटर एटम में नेगेटिव चार्ज वाले न्यूक्लियस और पॉजिटिव चार्ज वाले इलैक्ट्रोंस होते हैं। ये एक तरह का ईधन है, जिसे अंतरिक्षयान और विमानों में किया जाता है।
एंटीमैटर की ताकत
वैज्ञानिकों का मानना है कि सैद्धांतिक तौर पर करीब आधा किलो एंटीमैटर में दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोजन बम से भी ज्यादा विध्वंसक ताकत होती है। लेकिन, इससे उपयोगी ऊर्जा प्राप्त करने के लिए काफी बड़ी राशि की जरूरत होती है। नासा के प्रवक्ता के अनुसार, इस वक्त 1 मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में 250 लाख रुपए का खर्च बैठेगा। अनुसंधान आदि कार्यो के लिए एक मिलीग्राम काफी ज्यादा है, लेकिन बड़े उपयोग के लिए इतनी मात्रा की जरूरत पड़ेगी। व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल के लिए एंटीमैटर की कीमत को काफी नीचे लाना पड़ेगा।
कहां से आता है एंटीमैटर
एंटीमैटर एक काल्पनिक तत्व नहीं, बल्कि असली तत्व होता है। इसकी खोज बीसवीं शताब्दी में हुई थी। ये अंतरिक्ष में ही छोटे-छोटे टुकड़ों में मौजूद है। जिस तरह सभी भौतिक वस्तुएं मैटर यानी पदार्थ से बनती हैं और मैटर में प्रोटोन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, उसी तरह एंटीमैटर में एंटीप्रोटोन, पोसिट्रॉन्स और एंटीन्यूट्रॉन होते हैं। एंटीमैटर को बनाने के लिए लैब में वैज्ञानिक इसे दूसरे पदार्थों के साथ मिलाकर थोड़ा रिफाइन करते हैं। ताकि इसका इस्तेमाल ईधन के रूप में हो सके। अंतरिक्षयान और परमाणु हथियारों के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। रॉकेट लॉन्चर में भी है इसकी उपयोगिता है।
क्या है खासियत
1 ग्राम एंटीमैटर को बेचकर विश्व के 100 छोटे देशों को खरीदे जा सकते हैं। 1 ग्राम एंटीमैटर की कीमत 393.75 लाख करोड़ रुपए है। नासा के मुताबिक, एंटीमैटर धरती का सबसे महंगा मटीरियल है। एंटीमैटर जहां बनता है, वहां दुनिया की सबसे बेहतरीन सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। इतना ही नहीं, नासा जैसे संस्थानों में भी इसे रखने के लिए एक पुख्ता सुरक्षा घेरा है। कुछ खास लोगों के अलावा, एंटीमैटर तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। दिलचस्प है कि एंटीमैटर का इस्तेमाल अंतरिक्ष में जाने वाले विमानों के ईधन में किया जाता है।
क्यों महंगा है एंटीमैटर
एंटीमैटर को इसलिए सबसे महंगा माना जाता है, क्योंकि इसे बनाने वाली टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा खर्चीली है। 1 मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में 250 लाख रुपए तक लग जाते हैं। इसका इस्तेमाल अस्पतालों और रेडियोधर्मी अणुओं को पॉजिट्रान एमिशन टोमोग्राफी के रूप में मेडिकल इमेजिंग में भी होता है। इसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों में भी किया जाता है।

गूगल के रिस्ट्रक्चरिंग अनाउंसमेंट से इन्वेस्टर्स ने कुछ मिनटों में कमाए 1.28 लाख करोड़

सोमवार को गूगल ने बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग का अनाउंसमेंट किया है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में जोरदार उछाल देखने को मिला है। नैस्डैक पर लिस्टेड गूगल का शेयर 6.20 फीसदी चढ़कर 673 डॉलर प्रति शेयर के प्राइस पर क्लोज हुआ है। आखिरी एक घंटे की ट्रेडिंग के दौरान गूगल की मार्केट कैप में 2000 करोड़ डॉलर यानि 1.28 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। जिसकी सीधा फायदा उसके इन्वेस्टर्स को मिला है। ऐसा इसलिए हुआ है कि अनाउंसमेंट के बाद कंपनी के शेयर्स में तेजी से इजाफा हुआ है। इसकी वजह से उसके शेयरहोल्डर्स को कुछ ही मिनटों में अपने शेयर्स से मोटी कमाई का मौका मिल गया है।
कंपनी के प्रॉफिट में 27 फीसदी की ग्रोथ
बाजार के एक्सपर्ट्स बताते है कि नई रीस्ट्रक्चरिंग से निवेशकों में बड़ा उत्साह देखने को मिल रहा है। साथ ही कंपनी के अप्रैल-जून क्वॉर्टर के नतीजे भी शानदार रहे थे। कंपनी की आय 11 फीसदी बढ़कर 1770 करोड़ डॉलर (1,13,280 करोड़ रुपए हो गई है। वहीं, कंपनी का मुनाफा 27 फीसदी बढ़कर 480 करोड़ डॉलर (30,720 करोड़ रुपए) रहा था। जिसका असर कंपनी के शेयर पर देखने को मिला है। एक महीने के दौरान शेयर 20 फीसदी तक चढ़ चुका है।

Happy Birthday Jacqueline Fernandez!


Monday, August 10, 2015

McDonalds के बर्गर को टक्कर देगी ये यूएस कंपनी, युवराज ने लगाया पैसा

 भारत के बर्गर मार्केट में, मैकडॉनल्ड बड़ा नाम है। लेकिन एक के बाद एक इंटरनेशनल फास्ट फूड कंपनियां भारत में इन्वेस्ट करके मार्केट हथियाने में लगी हैं। ताजा एंट्री अमेरिकी कंपनी कार्ल्स जूनियर की है। नौ जुलाई को कार्ल्स जूनियर ने देश में अपना पहला रेस्टोरेंट दिल्ली के सेलेक्ट सिटी वॉक मॉल में खोला है। मैकडॉनल्ड से टक्कर लेने के लिए कंपनी ने क्रिकेटर युवराज सिंह से भी हाथ मिलाया है। युवराज सिंह की कंपनी यूवीकैन ने इस ब्रांड में पैसे लगाए हैं।
1941 में हुई थी कार्ल्स जूनियर की शुरुआत

अमेरिकन फास्ट-फूड चेन, कार्ल्स जूनियर सबसे पहले 1941 में खुला था। यह अपने जूसी बर्गर और मिल्कशेक के लिए दुनिया में फेमस है। इसका सिस्टर ब्रांड ‘हार्डिस’ मध्य पूर्व में काफी पसंद किया जाता है।
भारत के लिए किया मेन्यू में बदलाव, मिलेंगे ये बर्गर
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कार्ल्स जूनियर अपने चारग्रिल्ड चिकन बर्गर के लिए फेमस है। मगर भारत में इसने अपने मेन्यु में काफी बदलाव किए हैं। कार्ल्स जूनियर पहली बार वेज बर्गर बेच रहा है और इनके नाम भारतीय तर्ज पर ही रखे गए हैं। ताकि लोगों को आसानी से जोड़ा जा सके। भारत में यह बर्गर तंदूरी पनीर बर्गर, आलू अचारी और पनीर टिक्का नाम से मिलेंगे। इसके साथ ही कार्ल्स जूनियर अपने फेमस स्टार और सुपर स्टार बर्गर भी भारत में बेचेगा।

भारत में सिबिज ब्राइटस्टार ने कराई कार्ल्स जूनियर की एंट्री
भारत में कार्ल्स जूनियर की एंट्री गुड़गांव के सिबिज ब्राइटस्टार रेस्टोरेंट ने कराई है। सिबिज ब्राइटस्टार इस चेन के विस्तार के लिए 200 करोड़ रुपए इन्वेस्ट करेगा। कंपनी की योजना अगले 10 सालों में देश भर में 100 कार्ल्स जूनियर रेस्टोरेंट खोलने की है। भारत में बर्गर के कई ब्रांड पहले से ही मौजूद हैं ऐसे में कार्ल्स जूनियर के सामने प्रीमियम बर्गर मार्केट में अपनी अलग जगह बनाने की बड़ी चुनौती होगी।
पिछले पांच सालों में इन ब्रांड्स की हुई एंट्री
पिछले पांच सालों में, कई बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स ने भारत में एंट्री की है। इनमें से स्टारबक्स, क्रिस्पी क्रीम, बिग-बर्गर, वेंडिज, फैटबर्गर, बार्सेलोस, जॉनी रॉकेट्स, बर्गर किंग आदि शामिल हैं।
फिलहाल मैकडॉनल्डस है भारत का स्टार
सन् 1965 में अमेरिका के बाहर कनाडा में पहला मैकडॉनल्ड्स खुला था। इसी साल मैकडॉनल्ड्स को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाया गया था। मैकडॉनल्ड्स ऐसी फास्ट फूड चेन है, जिसका तेजी से ग्लोबलाइजेशन हुआ। सन 1994 तक दुनिया के 79 देशों में 15 हजार मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां स्थापित हो गए थे। सन 1996 में भारत दुनिया का 95वां देश था जहां मैकडॉनल्ड्स पहुंचा।
अब दुनिया के 119 देशों में है मैक-डी
आज दुनिया के 119 देशों में 31 हजार से ज्यादा काउंटर सर्विस, वॉक व ड्राइव-थ्रू सर्विस के इनडोर व आउटडोर सीटिंग वाले 31 हजार से ज्यादा मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां हैं जिनकी सालाना बिक्री 23 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।

4 भारतीय फिल्में, जिन्होंने वर्ल्डवाइड की 500 करोड़ रु. से ज्यादा की कमाई




 वह जमाना गया जब भारतीय फिल्मों के 100-200 करोड़ रुपए के कलेक्शन को बहुत बड़ी बात माना जाता था। आज के दौर में एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए ही इतनी रकम चाहिए। पिछले महीने रिलीज हुई 'बाहुबली' और 'बजरंगी भाईजान' को ही ले लीजिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डायरेक्टर एस. एस. राजामौली की फिल्म 'बाहुबली' की लागत जहां 160 करोड़ रुपए रही। वहीं, कबीर खान निर्देशित 'बजरंगी भाईजान' का निर्माण करीब 90 करोड़ रुपए में हुआ। खास बात यह है कि दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर न केवल शानदार रिजल्ट दिए, बल्कि कमाई की नई इबारत भी लिखी। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन) से ज्यादा की कमाई की है।
साल 2009 में डायरेक्टर राजकुमार हिरानी की फिल्म '3 इडियट्स' ने वर्ल्डवाइड 395 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर 300 करोड़ी क्लब की शुरुआत की। इसके बाद 'एक था टाइगर' (2012), 'दबंग 2' (2012), 'ये जवानी है दीवानी' (2013), 'कृष 3' (2013), 'किक' (2014), 'बैंग बैंग' (2014) और 'हैप्पी न्यू ईयर' (2014) इस क्लब में शामिल हुईं। 2013 में आई डायरेक्टर रोहित शेट्टी की फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' 422 करोड़ रुपए के कलेक्शन के साथ 400 करोड़ी क्लब में शामिल एकमात्र फिल्म है।
2013 में डायरेक्टर विजय कृष्ण आचार्य की आमिर खान स्टारर फिल्म 'धूम 3' ने 500 करोड़ी क्लब की शुरुआत की। अब तक चार भारतीय फिल्में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर चुकी हैं। इस लिस्ट में बाहुबली 533 करोड़ रुपए की कमाई के साथ चौथे स्थान पर है।

सुनील शेट्टी की बेटी ने जानें क्‍या कहा सलमान के बारे में

सुनील शेट्टी की बेटी आथिया जल्द ही बॉलीवुड में अपनी पारी की शुरूआत करने जा रही हैं। फिल्म 'हीरो' में उनके अपोजिट एक्टर आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली होंगे। दोनों को सुपरस्टार सलमान खान ने अपने बैनर तले लॉन्च करने का जिम्मा उठाया है।
यह किसी भी न्यू कमर एक्टर-एक्ट्रेस के लिए बड़ी बात होगी। आदित्य पंचोली के बेटे सूरज फिल्म 'हीरो' में काम करने का मौका देने के लिए पहले ही सार्वजनिक तौर पर सलमान का शुक्रिया अदा कर चुके हैं।
उनके बारे में जब आथिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मेरे पास वो शब्द ही नहीं है जिनसे मैं सलमान सर के प्रति अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर सकूं। उन्होंने हमें बहुत बड़ा प्लेटफाॅर्म दिया है। किसी भी डेब्यूटेंट के लिए यह एक सपने के सच होने जैसा है। हम यहां हैं तो केवल उन्हीं की बदौलत।'
वहीं, आथिया ने यह भी कहा कि वो बॉलीवुड में लंबी पारी खेलने आई हैं। उन्होंने कहा, 'एक्टिंग मेरे दिल में बसती है। मेरे लिए यह एक जूनून है। मैने सेट पर खूब मस्ती की। फिल्मों को मैं नियमित करना चाहूंगी। आशा है कि मैं यह कर पाऊं। बॉलीवुड में बहुत लंबे समय तक टिके रहने के लिए आई हूं।'
मॉडलिंग में करियर को लेकर आथिया ने कहा, 'मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा। मैं तो रैंप पर चलने को लेकर नर्वस थीं।' उनकी फिल्म 'हीरो' 11 सितंबर को रिलीज होने वाली है।

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