Wednesday, August 5, 2015

चलिए आज चलते हैं एक ऐसा गाँव, जो 1300 सालों से बसा है समुद्र पर


दुनियां में घुमने के लिए खुबसूरत स्थल, धार्मिक स्थल, झील, झरना पहाड, रेगिस्तान के अलावा भी कई एेसी जगहें हैं, जिसे देख कर हम आश्चर्यचकित हो जाऐं पर ऐसे अजीबोगरीब दुनियां की जानकारी नहीं होने के कारण हम यहां नहीं जा पातें और इस अचंभित कर देने वाली खुबसूरती से वंचित रह जाते हैं। तो आज हम आपको ऐसे जगह के बारें में बताएंगे। जिसे आपने कभी नहीं सुना होगा। सोचिए जिस जगह को सुना तक नहीं उसे देखने में कितना मजा आएगा।
क्या आपने कभी ऐसे घर की कल्पना की है जो की पानी के ऊपर हो ? शायद नहीं, पर दुनिया में एक ऐसी बस्ती है जो की पानी के ऊपर बसी है और वो भी पुरे 7000 लोगों की। यह है दुनिया की एक मात्र, समुद्र पर तैरती हुई बस्ती जो की चाइना में स्थित। ये बस्ती समुद्री मछुवारो की है जो टांका कहलाते है

कलाम की कविता से मिली प्रेरणा और 10 वर्षीय शुभम ने जीत ली दुनिया

 बेशक अब पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा दिखाया गया रास्ता और उनकी सीख हमेशा देश को आगे बढ़ने का हौसला देती रहेगी। करोड़ों लोगों को प्रेरित करने वाले कलाम की एक कविता ने भारत के 10 वर्षीय जूनियर गोल्फ स्टार शुभम जगलान को इस कदर प्रेरित किया कि उन्होंने दुनिया जीत ली। सैन डिएगो में जूनियर व‌र्ल्ड गोल्फ चैंपियनशिप और लास वेगास में व‌र्ल्ड स्टार्स जूनियर गोल्फ खिताब जीतने के बाद भारत लौटे शुभम जगलान को दिल्ली गोल्फ कोर्स में सम्मानित किया गया।
शुभम ने कहा कि पहला खिताब तो मैंने आसानी से जीत लिया था, लेकिन जब मैं लास वेगास में खेल रहा था तो मुकाबले में चार स्ट्रोक पीछे चल रहा था। उसी रात को गोल्फ फाउंडेशन के अमित लूथरा का एपीजे अब्दुल कलाम की फोटो के साथ व्हाट्सएप आया कि पूर्व राष्ट्रपति नहीं रहे। मैं काफी दुखी हो गया। इसके बाद अमित सर ने कलाम सर की एक प्रेरणादाई कविता मुझे भेजी। मैं काफी दुखी था, लेकिन उसे पढ़कर मुझे काफी शक्तिमिली और अगले दिन मैं लीडर बोर्ड में पांच स्ट्रोक आगे आकर नंबर वन बन गया।
शुभम ने कहा कि मैं इन दोनों खिताबों को जीतकर काफी खुश हूं। मैं पिछली बार दूसरे नंबर पर रह गया था, लेकिन इस बार चैंपियन बन गया। अब मैं और ज्यादा खिताब जीतने के लिए भूखा हो गया हूं। अब हर सप्ताह मैं और बेहतर गोल्फर बनकर सामने आना चाहता हूं। पानीपत (हरियाणा) के इसराना गांव के रहने वाले शुभम ने कहा कि इस जीत के बाद मुझे विज्ञापन और फिल्मों में काम करने के प्रस्ताव मिल रहे हैं, लेकिन मैंने उन सबको ठुकरा दिया है। मैं सिर्फ और सिर्फ अपने खेल पर ध्यान लगाना चाहता हूं।

रॉबी मैडिसन ने समुद्र की लहरों पर दौड़ाई बाइक

ऑस्ट्रेलियाई स्टंटबाज रॉबी मैडिसन ने लहरों पर बाइक दौड़ा कर अनोखा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। फ्रांस के नजदीक प्रशांत महासागर में छोटा सा द्वीप है ताहिती, मैडिसन ने अपना यह हैरतअंगेज स्टंट यहीं अंजाम दिया। हाल ही में इस स्टंट का वीडियो उन्होंने जारी किया। उनके नाम यूं भी कई रोमांचक स्टंट हैं, मगर समुद्र की लहरों पर बाइक की सवारी उनका सबसे यादगार स्टंट रहा। इस स्टंट को उन्होंने दूसरी बार में सफलतापूर्वक पूरा किया। पहले प्रयास में समुद्र में उनकी बाइक पलट गई थी। इस सफलता के दौरान भी उन्हें हर पल डर लग रहा था। उनका कहना है कि इससे पहले कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था।
दो साल की तैयारी के बाद मिली कामयाबी रेत या दलदल में दौड़ाई जाने वाली बाइक में स्की, प्रोपेलर और एक एयरबैग लगा कर उसे समुद्र की लहरों पर चलाने लायक बनाया। उसके बाद बाइक समेत मैडिसन को नाव से समुद्र में पहुंचाया गया। फ्रांस के नजदीक प्रशांत महासागर के ताहिती द्वीप पर आखिरकार दो साल की तैयारियों के बाद मैडिसन को सफलता मिली और उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया। 

बॉलीवुड में इन भाइयों की तिकड़ी' का रहा बोलबाला

सलमान और सोहेल के भाई अरबाज खान का आज जन्‍मदिन है। ये तीनों भाई आज भी बॉलीवुड में सक्रिय हैं। हालांकि सलमान, अरबाज और सोहेल अकेले भाइयों की तिकड़ी नहीं, जिसने बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई।

चुनाव हारने के बाद खुदकुशी करने की सोचने लगे थे ओबामा

साल 2009 में अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बन कर इतिहास रचने वाले बराक ओबामा आज (4 अगस्त) 54 साल के हो गए। एक दौर ऐसा भी था जब ओबामा चुनाव में हार और पत्नी मिशेल की बेरुखी के बाद आत्महत्या के बारे में सोचने लगे थे। एडवर्ड क्लेन की किताब 'द एमेच्योर' के मुताबिक, ओबामा साल 2000 में जब शिकागो से प्रतिनिधि सभा की सीट के लिए खड़े हो रहे थे, तब मिशेल भड़क गई थीं। मिशेल ने ओबामा से चुनाव नहीं लड़ने को कहा था। पत्नी की जिद ओबामा की महत्वाकांक्षा पर भारी पड़ रही थी। वह बहुत निराश हो गए थे।
दोस्तों को डर था कि ओबामा कहीं आत्महत्या न कर लें। दूसरी तरफ, मिशेल ने तलाक के पेपर तैयार करा लिए थे। वह इस बात से निराश थीं कि ओबामा ने उनकी सलाह नहीं मानी। उस वक्त ओबामा-मिशेल की शादी को आठ साल हो गए थे। 2000 में शिकागो सीट पर ओबामा का मुकाबला बॉबी रश के साथ था। आखिरकार वही हुआ जिसका मिशेल को डर था। ओबामा ये चुनाव हार गए। ऐसा लगा अब ओबामा का राजनीतिक करियर खत्म हो गया। ओबामा के लिए वह समय काफी मुश्किलों भरा था, लेकिन मिशेल ने सहानुभूति नहीं जताई। हालांकि, कुछ महीनों के बाद ओबामा और मिशेल के बीच मतभेद दूर हो गए।
हवाई में हुआ जन्म
बराक ओबामा का जन्म 4 अगस्त, 1961 को हवाई के होनोलूलू शहर में केपिओलानी मेडिकल सेंटर में हुआ था। ओबामा के पिता का नाम बराक ओबामा सीनियर है। वो केन्या के रहने वाले थे, जबकि मां अन्न दुन्हम श्वेत अमेरिकन महिला थीं। ओबामा जब दो साल के थे, तभी दोनों का तलाक हो गया था।
इस्लाम मानने की उड़ी अफवाहें
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में रहने और कीनियाई मुस्लिम पिता के बेटे होने की वजह से दक्षिणपंथियों ने ये खूब प्रचार किया कि ओबामा गुप्त रूप से इस्लाम धर्म को मानते हैं। हालांकि, बराक ओबामा इन अफवाहों को गलत साबित करने में सफल रहे।
मिशेल से लॉ फर्म में हुई मुलाकात

न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट ओबामा शिकागो के गरीब इलाकों में तीन साल तक कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर के रूप में काम करते रहे। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल में पढ़ाई की।

शिकागो की एक लॉ फर्म में काम करते हुए वे मिशेल रॉबिन्सन से मिले और 1992 में दोनों ने शादी कर ली। उनकी दो बेटियां मलिया और साशा हैं। हार्वर्ड की डिग्री के बाद वे नागरिक अधिकार मामलों की वकालत करने लगे। फिर वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो में पढ़ाने लगे।
मिशेल से लॉ फर्म में हुई मुलाकात

न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट ओबामा शिकागो के गरीब इलाकों में तीन साल तक कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर के रूप में काम करते रहे। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल में पढ़ाई की।

शिकागो की एक लॉ फर्म में काम करते हुए वे मिशेल रॉबिन्सन से मिले और 1992 में दोनों ने शादी कर ली। उनकी दो बेटियां मलिया और साशा हैं। हार्वर्ड की डिग्री के बाद वे नागरिक अधिकार मामलों की वकालत करने लगे। फिर वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो में पढ़ाने लगे।
ओबामा का करियर 
बराक ओबामा ने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो लॉ स्कूल में पढ़ाया। डेविस-माइनर-बार्नहिल एंड गैलेंड लॉ फर्म के अटॉर्नी और हार्वर्ड लॉ रिव्यू के पहले अश्वेत प्रेसिडेंट।

सीनेट के पहले अश्वेत कॉकस सदस्य। 
1997 और 2004 में इलिनॉयस से सीनेट के लिए चुने गए।
2008 और 2012 में बराक ओबामा को अमेरिका का प्रेसिडेंट घोषित किया गया।
नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजे गए
साल 2009 में ओबामा को शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। हमेशा अपने साथ गुडलक और मडोना का छोटा स्टैचू रखने वाले ओबामा ने एक एल्बम में अपनी आवाज देने के लिए ग्रैमी अवॉर्ड भी जीता है। वो फैंटेसी नॉवेल हैरी पॉटर के भी शौकीन हैं और उन्होंने इसकी सभी सीरीज पढ़ी हैं।

'बाहुबली' ने बनाया नया रिकॉर्ड, हिंदी वर्जन की कमाई 100 करोड़ पार

डायरेक्टर एस. एस. राजामौली की फिल्म 'बाहुबली' के हिंदी वर्जन ने 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म के हिंदी वर्जन ने रविवार को 3.40 और सोमवार को 1.52 करोड़ की कमाई की है। अब तक का टोटल कलेक्शन 105.03 करोड़ रुपए हो गया है। गौरतलब है कि 'बाहुबली' से पहले किसी भी साउथ इंडियन फिल्म ने इस तरह का कीर्तिमान नहीं बनाया है। रजनीकांत स्टारर 'एंथिरण' (रोबोट, हिंदी वर्जन) 26 करोड़ रुपए के कलेक्शन के साथ अभी तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली साउथ इंडियन फिल्म थी।

वर्ल्डवाइड कलेक्शन 504 करोड़ रुपए

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 'बाहुबली' का ग्रॉस कलेक्शन 504.35 करोड़ रुपए हो चुका है। फिल्म ने 25वें दिन यानी सोमवार को करीब 4.55 करोड़ रुपए कमाए हैं। फिल्म का 24 दिन का ग्लोबल कलेक्शन 499.8 करोड़ रुपए था।

10 जुलाई को रिलीज हुई थी फिल्म

'बाहुबली' 10 जुलाई को रिलीज हुई थी। प्रभास, राणा दग्गुबती, तमन्ना भाटिया और अनुष्का शेट्टी स्टारर इस फिल्म ने पहले दिन ही 60 करोड़ की कमाई कर रिकॉर्ड कायम किया था। वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है। इसके बाद 44.97 करोड़ के कलेक्शन के साथ शाहरुख खान स्टारर 'हैप्पी न्यू ईयर' का नंबर आता है।

बाहुबली के बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड

>>बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग डे सबसे ज्यादा कमाई (60 करोड़ रुपए) करने वाली भारतीय फिल्म।
>>दो दिन में 100 करोड़ की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म।
>>>> रिलीज के महज 5 दिनों बाद फिल्म 'बाहुबली' ने दुनियाभर में 200 करोड़ रुपए बटोरे है। 5 दिनों में 200 करोड़ क्लब में शामिल होकर फिल्म ने नया रिकॉर्ड बनाया है।
>>सबसे ज्यादा कमाई (105 करोड़ रुपए) करने वाला हिंदी डब्ड वर्जन (सभी भारतीय भाषाओं में)।
>>रोबोट के हिंदी डब्ड वर्जन की लाइफटाइम कमाई (26 करोड़ रुपए) का रिकॉर्ड तोड़ा।
>>27 करोड़ रुपए की कमाई के साथ साउथ इंडिया में हाईएस्ट ओपनिंग डे कलेक्शन।
>>रिलीज के महज 9 दिनों में 300 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाली पहली भारतीय फिल्म है 'बाहुबली'।
>>'बाहुबली' ने अमेरिका और मलेशिया में आमिर खान स्टारर फिल्म 'पीके' की कमाई के रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 'बाहुबली' ने अमेरिका में फर्स्ट वीकेंड पर 28.07 करोड़ रुपए और मलेशिया में करीब 23.43 लाख रुपए की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है।

कभी बंद होने वाली थीं ये 5 कंपनि‍यां, बैकअप प्लान से आज हैं मार्केट लीडर्स

पॉपुलर ब्रांड्स का मार्केट से गायब हो जाना नया नहीं है। हां, अगर वह ब्रांड्स या कंपनि‍यां मार्केट में दोबारा लौट आती हैं तो इसे अनोखा माना जाता है। कोडक, कॉम्‍पैक जैसे पॉपुलर ब्रांड्स बदलती टेक्‍नोलॉजी का मुकाबला नहीं पर पाए और अचानक ही बाजार से गायब हो गए। यह ब्रांड्स दोबारा वापसी भी नहीं कर सके। लेकिन, कुछ ब्रांड ऐसे भी रहे जो एक वक्‍त बंद होने की कगार पर आ गए थे और उन्‍होंने वहां से जोरदार तरीके से वापसी की। एप्‍पल, ओल्‍ड स्‍पाइस, फॉक्‍सवैगन ऐसी ही कुछ ब्रांड हैं। प्रोडक्‍ट को बदलने और मार्केटिंग स्‍ट्रैटजी पर खर्च बढ़ाने से इन्‍होंने अपनी जगह और पहचान दोबारा हासि‍ल कर ली। आज यह करोड़ों डॉलर का कारोबार कर रहे हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही ब्रांड्स की कहानी...
एप्‍पल
1976 में स्‍वीट जॉब्‍स ने अपने दो साथियों के साथ एप्‍पल कंप्‍यूटर की नींव रखी थी। 1980 तक आते-आते यह कंपनी दुनिया के सबसे बड़े पर्सनल कंप्‍यूटर मैन्‍युफैक्‍चरर्स में एक हो गई। हालांकि 1985 में कुछ विवाद के बाद स्‍टीव जॉब्‍स ने एप्‍पल से नाता तोड़ दिया और जॉन स्‍क्रूली ने इसकी कमान संभाली। स्‍क्रूली के नेतृत्‍व में कुछ दिनों तक तो एप्‍पल ने ठीक-ठाक कारोबार किया लेकिन बाद में उसकी हालात बिगड़ने लगी। 1990 तक कंपनी का प्रदर्शन बेहद खराब हो गया। एक समय कंपनी के बंद करने की नौबत आ गई। 1997 में जॉब्‍स ने एप्‍पल में दोबारा वापसी की। उस वक्‍त एप्‍पल को माइक्रोसॉफ्ट से 1.50 करोड़ डॉलर का इंवेस्‍टमेंट मि‍ला। 1998 में कंपनी ने आईमैक और 2001 में आईपॉड को लांच किया। इन प्रोडक्‍ट्स के जरिए एप्‍प्‍ल ने मार्केट में जोरदार वापसी की। 2007 में कंपनी का नाम एप्‍पल इंक हो गया।
जनरल मोटर्स
अमेरिका में 2008 में सबप्राइम संकट गहराने के बाद यहां के दिग्गज बैंकों और कंपनियों के दिवालिया होने का जो भयावह दौर शुरू हुआ, वह खत्म नहीं हुआ। इस सूची में एक ऐसी कंपनी का नाम जुड़ गया, जो पिछले 77 वर्ष से न केवल अमेरिकी बल्कि समूचे ग्लोबल ऑटोमोबाइल मार्केट पर राज कर रही थी। यह कंपनी थी जनरल मोटर्स कॉरपोरेशन। लगातार घटती बिक्री और गैस के चढ़ते दाम के कारण जनरल मोटर्स की हालत इस कदर खस्‍ता हो गई कि उसने खुद को दिवालिया घोषित करने का अप्‍लीकेशन दे दिया। कंपनी ने खुद पर 172.81 अरब डॉलर का कर्ज होने की सूचना दी। मंदी की मार झेल चुकी वाहन बनाने वाली 102 वर्ष पुरानी जीएम ने 2010 में उस वक्‍त तक दुनिया के सबसे बड़े आईपीओ के जरिए 22.1 अरब डॉलर जुटाकर धमाकेदार वापसी की। वहीं, कंपनी का मुनाफा 4.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। 2004 के बाद कंपनी का यह सर्वाधिक मुनाफा था।

मार्वल
कॉमि‍क बुक इंडस्‍ट्री में सबसे बड़ा ब्रांड मार्वल को माना जाता था, जिसने स्‍पाइडर-मैन, एक्‍स–मैन और द हल्‍क जैसे पॉपुलर कि‍रदारों को बनाया। लेकि‍न मार्वल की सफलता से पहले वह एक समय पर बंद होने की कगार पर आ गई थी। 1996 में कॉमि‍क बुक और ट्रेडिंग कार्ड की सेल्‍स घटने से कंपनी ने दि‍वालि‍या के लि‍ए आवदेन भर दि‍या था। लेकि‍न, 2000 में कंपनी ने एक्‍स-मैन मूवी को रि‍लीज कि‍या जि‍ससे उसे दुनि‍या भर से करीब 30 करोड़ डॉलर की कमाई हुई। दो साल बाद, स्‍पाइडर-मैन रि‍लीज हुई और डि‍ज्‍नी ने 4 अरब डॉलर में खरीदा। इसके बाद ‘एक्‍स-मैन: फस्‍ट क्‍लास’ को रि‍लीज कि‍या, जि‍ससे 35.3 करोड़ डॉलर की कमाई हुई।
ओल्‍ड स्‍पाइस
मेल ग्रूमिंग प्रोडक्‍ट में ओल्‍ड स्‍पाइस दुनिया भर के बड़े ब्रांड में से एक है। 1934 में इस ब्रांड की नींव रखी गई थी, जिसे 1990 में प्रॉक्‍टर एंड गैम्‍बल ने खरीद लिया। उस वक्‍त तक उसकी सेल्‍स काफी नीचे जा चुकी थी। इस ब्रांड को लोगों ने खरीदना ही बंद कर दि‍या था। मार्केट से ब्रांड के गायब होने का खतरा मंडराने लगा था। हालांकि, बाद में प्रॉक्‍टर एंड गैम्‍बल (पीएंडजी) ने एग्रेसिव तरीके से इसकी मार्केटिंग की। इसके बाद मार्केट में ओल्‍ड स्‍पाइस रेड जोन को पेश कि‍या और ऐड कैम्‍पेन को नए तरीके से लॉन्‍च कि‍या गया। इसका फोकस युवाओं को रखा गया। इसका पॉजीटिव असर ब्रांड पर हुआ और 2010 में कंपनी की सेल्‍स 107 फीसदी तक बढ़ गई।
ओल्‍ड स्‍पाइस
मेल ग्रूमिंग प्रोडक्‍ट में ओल्‍ड स्‍पाइस दुनिया भर के बड़े ब्रांड में से एक है। 1934 में इस ब्रांड की नींव रखी गई थी, जिसे 1990 में प्रॉक्‍टर एंड गैम्‍बल ने खरीद लिया। उस वक्‍त तक उसकी सेल्‍स काफी नीचे जा चुकी थी। इस ब्रांड को लोगों ने खरीदना ही बंद कर दि‍या था। मार्केट से ब्रांड के गायब होने का खतरा मंडराने लगा था। हालांकि, बाद में प्रॉक्‍टर एंड गैम्‍बल (पीएंडजी) ने एग्रेसिव तरीके से इसकी मार्केटिंग की। इसके बाद मार्केट में ओल्‍ड स्‍पाइस रेड जोन को पेश कि‍या और ऐड कैम्‍पेन को नए तरीके से लॉन्‍च कि‍या गया। इसका फोकस युवाओं को रखा गया। इसका पॉजीटिव असर ब्रांड पर हुआ और 2010 में कंपनी की सेल्‍स 107 फीसदी तक बढ़ गई।

2.43 लाख करोड़ की कंपनी का CEO है यह शख्स, ये हैं इनसे जुड़ी 5 खास बातें

 विशाल सिक्का ने जब एक साल पहले देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर इंफोसिस की कमान संभाली थी, तो कंपनी नेतृत्व के संकट से जूझ रही थी। नेतृत्व का यह संकट इतना गहरा था कि प्रबंधन को 2011 में सेवानिवृत्त हो चुके इंफोसिस के को-फाउंडर और पूर्व चेयरमैन एन आर नारायण मूर्ति को जून 2013 में कंपनी में एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में वापस लाना पड़ा। एक साल की मशक्कत के बाद उन्हें विशाल सिक्का मिले और अगस्त 2014 में उनकी ताजपोशी की गई। अब विशाल सिक्का को एक साल पूरा हो चुका है। 2.43 लाख करोड़ रुपए की कंपनी की ग्रोथ को देखते हुए कहा जा सकता है कि विशाल इस पद के सही दावेदार साबित हुए।
सिक्का के नेतृत्व में छू ली बुलंदियां
जून 2015 को खत्म हुए क्वार्टर में इंफोसिस की आय 7 फीसदी बढ़ गई, जो पिछली 15 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। अगस्त 2014 से ही विशाल सिक्का ने कंपनी की कमान संभाली थी। तब से अब तक कंपनी को अच्छी ग्रोथ हासिल हुई है।
सीईओ बनने से पहले भी इंफोसिस में थे सिक्का
विशाल सिक्का इंफोसिस से पहले सैप के एक्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर रह चुके हैं। आपको बता दें कि विशाल सिक्का ऐसे पहले बाहरी व्यक्ति हैं,जिन्हें इंफोसिस का फाउंडर न होने के बावजूद सीईओ के रूप में चुना गया। सिक्का ने अपनी स्कूलिंग बड़ौदा के रोजरी हाईस्कूल से पूरी की। उनके पिता बतौर रेलवे ऑफिसर इसी शहर में तैनात थे। बड़ौदा की एसएस यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने के बाद सिक्का ने अमेरिका की सायराकूज यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर की पढ़ाई की। सिक्का ने अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी डॉक्टरेट किया। सिक्का सिलिकॉन वैली का एक जाना-माना चेहरा हैं और SAP के संस्थापक हैसो प्लैटनर के बेहद करीबी रहे हैं।
भारत से जुड़ी विशाल की यादें
मध्य प्रदेश के शाजापुर शहर में जन्मे विशाल सिक्का के पिता भारतीय रेलवे में अफसर थे। उनके ट्रांसफर के बाद सिक्का का परिवार बड़ौदा शिफ्ट कर गया। विशाल सिक्का की प्राइमरी एजुकेशन की शुरुआत बड़ौदा के रोजरी हाई स्कूल से हुई। एमएस यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे विदेश चले गए। जहां उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में पीएचडी की।
माइक्रो ब्लॉगिंग का शौक
विशाल सिक्का लगातार माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर पर अपने दोस्त, कर्मचारियों और चाहने वालों से संपर्क में रहते हैं। ट्विटर पर उनके करीब 18 हजार फॉलोअर हैं। जहां वे टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर बात पर लोगों का जवाब देते हैं। खास बात है कि इंफोसिस के नारायण मूर्ति ने उनकी नियुक्ति की घोषणा भी ट्विटर के जरिए की।

Tuesday, August 4, 2015

ये है दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, हर साल बढ़ जाती है इसकी हाइट

एक ओर जहां महाकाल और अन्य शिवलिंगों के
आकार के छोटे होते जाने की खबर आती
है। वहीं, एक शिवलिंग ऐसा भी है
जिसका आकार घटता नहीं बल्कि हर साल और बढ़
जाता है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित
भूतेश्वरनाथ शिवलिंग संभवतः प्राकृतिक रूप से निर्मित दुनिया का
सबसे बड़ा शिवलिंग है। यह जमीन से लगभग 18
फीट ऊंचा और 20 फीट गोलाकार है।
राजस्व विभाग द्वारा हर साल इसकी उचांई
नापी जाती है, जिसमें हर साल यह 6 से
8 इंच तक बढ़ा हुआ पाया जाता है।
गरियाबंद जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर
दूर घने जंगलों के बीच बसे मरौदा गांव में यह शिवलिंग
स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों की तरह इसे
भी अर्धनारीश्वर शिवलिंग होने
की मान्यता प्राप्त है। इस शिवलिंग का दर्शन करने
और जलाभिषेक करने हर साल सैकड़ों की संख्या में
कांवरिए पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं। यहां आने वाले भक्तों
की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है।
शेर के दहाड़ने की आती है आवाज
इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि कई साल पहले
जमींदारी प्रथा के समय पारागांव
निवासी शोभा सिंह जमींदार की
यहां पर खेती-बाड़ी थी। शोभा
सिंह शाम को जब अपने खेत मे घूमने जाते थे तो उन्हें एक
टीले से सांड़ के हुंकारने (चिल्लाने) एवं शेर के
दहाड़ने की आवाज सुनाई पड़ती
थी। शुरू में उन्हें लगा कि ये उनका वहम है, लेकिन
कई बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभा सिंह ने ग्रामवासियों को
इस बारे में बताया। ग्रामवासियों ने भी टीले के
पास कई बार आवाज सुनी थी। इसके बाद
सभी ने आसपास सांड़ अथवा शेर की
तलाश की, लेकिन दूर-दूर तक कोई जानवर
नहीं मिला। तब लोगों ने माना कि इसी
टीले से आवाज आती है और
टीले को भर्कुरा/भकुरा (हुंकारने की
आवाज) कहने लगे।
प्रकृति प्रदत्त जलहरी भी
पारागांव के लोग बताते हैं कि पहले यह टीला छोटे रूप
में था पर धीरे-धीरे इसकी
उंचाई व गोलाई बढ़ती गई। इसका बढ़ना आज
भी जारी है। लोग इस टीले को
शिवलिंग के रूप में पूजने लगे। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत्त
जलहरी भी दिखाई देती है,
जो धीरे-धीरे जमीन के ऊपर
आती जा रही है।
छत्तीसगढ़ी भाषा में हुंकारने
की आवाज को भकुर्रा कहते हैं, इसी से
भूतेश्वरनाथ को भकुर्रा महादेव भी कहते हैं।

सोनम ने भी पॉर्न साइट्स पर बैन लगाने वालों की ली खबर

देश भर में पॉर्न साइट्स पर बैन लगाने के
फैसले को लेकर लोगों का गुस्सा फूट रहा है। अपनी
भड़ास निकालने के लिए लोग सोशल मीडिया का सहारा ले
रहे हैं। इनमें बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर
भी शामिल हैं। उन्होंने ट्वीट कर ऐसा
करने वालों के खिलाफ निशाना साधा है।

जी हां, सोनम कपूर ने ट्वीट कर लिखा
है, 'उन बेवकूफों को बैन करो, जो ये सोचते हैं कि
चीजों पर बैन लगाने से भारतीय मानसिकता
भी बदल जाएगी।' ये रहा उनका
ट्वीट।

चेतन भगत, आदित्य चोपड़ा और राम गोपाल वर्मा जैसी
हस्तियों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। वैसे
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मजाक उड़ाने
वाली हस्तियों की भी
कमी नहीं हैं। इनमें अपने बड़बोलेपन
के लिए जाने जाने वाले कमाल आर खान और निम्रत कौर
भी शामिल हैं।

The dumb people of Bollywood, according to Kangana Ranaut

Kangana Ranaut has faced a lot of struggle through her years in Bollywood. It's remarkable to think of how far she's come since she started her career.

Attaining fame gets you a lot of friends, but there are hardly people who stand by you when you are facing your lows. And who better to know of that than Kangana Ranaut.
She is a star who made it big in the industry, but only after facing troublesome times, despite critical acclaim. After her terrific performances in Queen and Tanu Weds Manu (and then its sequel), she is now among the most sought after actors in B-Town. Offers from all the industry biggies, including projects from award winning directors Raj Kumar Hirani and Vishal Bharadwaj are testimony to the fact.
While speaking to NDTV, Kangana said that while there are those who get carried away, she is more evolved. She also spoke about those who refused to work with her when she was down and out, and pointed out that they were 'dumb'.
Speaking about the praise that she is getting now, she quipped, "I know that there are people for whom big names matter, but I am not from that school of thought. It doesn't matter to me."
We must say, she is certainly not, as she put it, 'conventional'!
Ranaut has been in the limelight for several years now. Her debut film Gangster created ripples in the industry, and her performance in Fashion won her her first National Award. This year too, the actor picked up a National Award for her performance in Queen. But the 28 year old Himachali girl has had to prove herself time and time again.
She has not shied away from challenging parts, be it a Revolver Rani or a double role in Tanu Weds Manu Returns. She is soon to be seen in Nikhil Advani's rom-com Katti Batti, starring Imran Khan as the male lead where she plays the character of an urban girl who has commitment issues. The National Award winner has come a long way, and considering her consistency in nailing her roles on camera, it seems that she is still ready to dazzle us with more!